आर्य भट्ट ने शून्य की खोज की तो रामायण में रावण के दस सर की गणना कैसे की गयी?

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आर्य भट्ट ने शून्य की खोज की तो रामायण में रावण के दस सर की गणना कैसे की गयी?

कुछ लोग हिन्दू धर्म व रामायण महाभारत गीता को काल्पनिक दिखाने के लिए यह प्रश्न करते है। जब आर्य भट्ट ने लगभग 6वी शताब्दी मे शून्य/जीरो की खोज की थी तो फिर आर्यभट्ट की खोज से लगभग 5000 हजार वर्ष पहले रामायण मे रावण के 10 सिर की गिनती कैसे की गई। और महाभारत मे कौरवो की 100 की संख्या की गिनती कैसे की गई, जबकि उस समय लोग जीरो को जानते ही नही थे। तो लोगो ने गिनती को कैसे गिना?

हिन्दू बिरोधी और नास्तिक लोग सिर्फ अपने गलत कुतर्क द्वारा हिन्दू धर्म व हिन्दू धर्मग्रंथो को काल्पनिक साबित करना चाहते है। जिससे हिन्दूओ के मन मे हिन्दू धर्म के प्रति नफरत भरकर और हिन्दू धर्म को काल्पनिक साबित करके, हिन्दू समाज को अन्य धर्मों में परिवर्तित किया जाए। लेकिन आज का हिन्दू समाज अपने धार्मिक शिक्षा को ग्रहण ना करने के कारण इन लोगो के झूठ को सही मान बैठता है। यह हमारे धर्म व संस्कृत के लिए हानिकारक है। अपनी सभ्यता पहचाने, गर्व करे की हम भारतीय है। इस आर्टिकल के ज़रिये आज आप इसका बिलकुल ठीक उत्तर हम बता रहे हैं। इसलिए इस आर्टिकल को आपको ध्यान से देखने की आवश्यकता है।

तो सुनिए, आर्यभट्ट से पहले संसार 0 (शून्य) को नही जानता था। आर्यभट्ट ने ही शून्य/ जीरो की खोज की, यह एक सत्य है। लेकिन आर्यभट्ट ने 0 (जीरो) की खोज अंको मे की थी, शब्दों में खोज नहीं की थी। उससे पहले 0 अंक को शब्दो मे शून्य कहा जाता था।

उस समय मे भी हिन्दू धर्म ग्रंथो मे जैसे शिव पुराण, स्कन्द पुराण में आकाश को शून्य कहा गया है। यहाँ पर शून्य का मतलब अनंत से होता है। लेकिन रामायण व महाभारत काल मे गिनती अंको मे न होकर शब्दो मे होती थी और वह भी संस्कृत में। उस समय 1,2,3,4,5,6,7,8, 9,10 अंक के स्थान पर शब्दो का प्रयोग होता था। वह भी संस्कृत के शब्दों का प्रयोग होता था।

जैसे –




  • 1 को प्रथम
  • 2 को द्वितीय
  • 3 को तृतीय
  • 4 को चतुर्थ
  • 5 को पंचम
  • 6 को षष्टं
  • 7 को सप्तम
  • 8 को अष्टम
  • 9 को नवंम
  • 10 को दशम लिखा जाता था

यानी दशम मे दस तो आ गया, लेकिन अंक का 0 (जीरो/शून्य ) नही आया, रावण को दशानन कहा जाता है। दशानन मतलब दश+आनन मतलब दश सिर वाला। अब आपको समझ आ गया होगा की रावण के दस सिर की गिनती किस प्रकार की गई। आप देख सकते हैं कि इसके सर गिनने में अंको का 0 (जीरो) नही आया, जिसकी खोज आर्यभट्ट ने की थी। ठीक इसी प्रकार महाभारत काल मे संस्कृत शब्द मे कौरवो की सौ की संख्या को शत-शतम बताया गया। शत् एक संस्कृत का शब्द है, जिसका हिन्दी मे अर्थ सौ (100) होता है। सौ (100) को संस्कृत मे शत् कहते है। शत = सौ, इस प्रकार महाभारत काल मे कौरवो की संख्या गिनने मे सौ हो गई। लेकिन इस गिनती मे भी अंक का ०० (डबल जीरो) नही आया और गिनती भी पूरी हो गई। अगर आपने महाभारत पढ़ी होगी तो आप जानते होंगे की महाभारत धर्मग्रंथ में कौरव की संख्या शत बताया गया है।

आईये अब थोड़ा रोमन में भी जान लेते हैं-

रोमन मे 1-2-3-4-5-6-7-8-9-10 की जगह पे (¡) (¡¡) (¡¡¡) पाँच को V कहा जाता है। दस को x कहा जाता है। रोमन मे x को दस कहा जाता है। X मतलब दस इस रोमन x मे अंक का 0 (जीरो) नही आया लेकिन इसके बिना भी हमने दश पढ भी लिया और गिनती पूरी हो गई। अब आप समझ सकते हैं कि रोमन Word मे कही 0 (जीरो) नही आता है। इसके बावजूद भी आप रोमन मे एक से लेकर सौ की गिनती पढ और लिख सकते है। आपको 0 या 00 लिखने की जरूरत भी नही पड़ती है।

पहले के जमाने मे गिनती को शब्दो मे लिखा जाता था। उस समय अंको का ज्ञान नही था। जैसे गीता, रामायण मे 123456 या बाकी पाठो (Lesson) को इस प्रकार पढा जाता है। जैसे – प्रथम अध्याय, द्वितीय अध्याय, पंचम अध्याय, दशम अध्याय इनके दशम अध्याय ‘ मतलब दशवा पाठ (10 Lesson) होता है। दशम अध्याय मतलब दसवा पाठ इसमे दश शब्द तो आ गया। लेकिन इस दश मे अंको का 0 (जीरो) का प्रयोग नही हुआ। बिना 0 आए पाठो (Lesson) की गिनती दश हो गई ।

तो हमें उम्मीद है कि इस आर्टिकल से आपको काफी जानकारी मिली होगी। और आपके काफी सरे Doubt Clear हुए होंगे।



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