कैलाश पर्वत के कुछ छुपे रहस्य Secrets of Mount Kailash

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कैलाश पर्वत के कुछ छुपे रहस्य

कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि लोगों की आस्था का मानक है, कहते है सारे ‘तीरथ सौ बार, कैलाश यात्रा एक बार‘ इसलिए हर भक्त की दिली ख्वाईश होती है कि वो अपने जीवन के अंतिम सांस से पहले एक बार कैलाश-मानसरोवर की यात्रा जरूर कर ले

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी के पास कुबेर की नगरी है। यहीं से महाविष्णु के कर-कमलों से निकलकर गंगा कैलाश पर्वत की चोटी पर गिरती है, जहां प्रभु शिव उन्हें अपनी जटाओं में भर धरती में निर्मल धारा के रूप में प्रवाहित करते हैं। कैलाश पर्वत के ऊपर स्वर्ग और नीचे मृत्यलोक है। तो आईये जानते हैं इसके कुछ रहस्यों के बारे में जो आप नहीं जानते।

कैलाश पर्वत के रहस्य

धरती का केंद्र:

धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का केंद्र है।

फास्ट एजिंगः

विज्ञान की भाषा में तेजी से शरीर के क्षरण होने की प्रक्रिया को ‘फास्ट एजिंग‘ कहते हैं। ‘फास्ट एजिंग‘ अर्थात ‘तेज आयुवृद्धि‘। इसे इस तरह समझें कि यदि सामान्य दिनों की तरह हमारे नाखूनों को हम 1 माह में 4 बार काटते हैं तो हमें वहां 1 दिन में 4 बार काटने होंगे। कहते हैं कि एक ऐसा समय था जबकि चीन ने दुनिया के धुरंधर क्लाइंबर्स को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी लेकिन सभी के प्रयास असफल सिद्ध हुए। बाद में यहां अनुमति देना बंद कर दिया गया। अनुमति दिए जाने के दौरान ही एक बार 4 पर्वतारोहियों ने कैलाश के ठीक नीचे स्थित ‘जलाधारी‘ तक पहुंचने की योजना बनाई। कहते हैं कि इनमें 1 ब्रिटिश, 1 अमेरिकन और 2 रूसी थे। सभी अपने बेस कैम्प से कैलाश पर्वत की ओर निकले।

वे कुशल पर्वतारोही थे और काफी आगे तक गए। बाद में 1 सप्ताह तक उनका कुछ अता-पता नहीं चला लेकिन जब वे लौटे, तो उनका हुलिया एकदम बदल चुका था। आंखें अंदर की ओर धंस गई थीं। 1 सप्ताह में ही दाढ़ी और बाल हद से ज्यादा बढ़ गए थे। उनके अंदर काफी कमजोरी आ गई थी। ऐसा लग रहा था कि वे 8 दिन में ही कई माह आगे जा चुके हैं। कुछ के अनुसार वे कई साल आगे जा चुके थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन दिग्भ्रमित अवस्था में उन चारों ने कुछ दिन बाद ही दम तोड़ दिया।

डमरू और ओम की आवाज:

यदि आप कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के क्षेत्र में जाएंगे, तो आपको निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज ‘डमरू‘ या ‘ॐ‘ की ध्वनि जैसी होती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि हो सकता है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से ‘ॐ‘ की आवाजें सुनाई देती हैं।

ऊं पर्वत और स्वास्तिक का आकार

ऊं पर्वत और स्वास्तिक का आकार सूर्य के स्थिर होने पर पर्वत पर एक परछाई बनती है जोकि धार्मिक चिह्न स्वास्तिक की तरह दिखाई देता है। हिंदू धर्म में इसे अत्यंत शुभ चिह्न माना जाता है। इसके अलावा पर्वत पर गिरती बर्फ से ऊं का आकार बनता है। ये भी एक रहस्य ही है

अलौकिक शक्ति का केंद्र:

यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं।

यहीं से क्यों सभी नदियों का उद्गम:

इस पर्वत की कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं। कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है। पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।

दो रहस्यमयी सरोवरों का रहस्य:

यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?

कैलाश पर्वत अपनी स्थिति बदलता रहता हैः

बहुत से लोगों ने कैलाश पर्वत की चोटी पर पहुंचने की कोशिश की है, लेकिन कभी-कभी अत्यधिक खराब जलवायु परिस्थितियों के कारण और कभी-कभी पहाड़ द्वारा अपने लक्ष्य स्थान को बदलने के कारण कोई भी अपने प्रयास में सफल नहीं हुआ है. जी हां, आपने इसे सही पढ़ा! लोगों को ऐसा महसूस होता है कि कैलाश पर्वत की चोटी पर चढ़ने के दौरान वे अपने रास्ते से भटक जाते थे.

शिखर पर कोई नहीं चढ़ सकता:

कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध है, परंतु 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी। रशिया के वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट ‘यूएनस्पेशियल‘ मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी। हालांकि मिलारेपा ने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा इसलिए यह भी एक रहस्य है।

सिर्फ पुण्यात्माएं ही निवास कर सकती हैं:

यहां पुण्यात्माएं ही रह सकती हैं। कैलाश पर्वत और उसके आसपास के वातावरण पर अध्ययन कर चुके रशिया के वैज्ञानिकों ने जब तिब्बत के मंदिरों में धर्मगुरुओं से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह है जिसमें तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरुओं के साथ टेलीपैथिक संपर्क करते हैं।

येति मानव का रहस्य:

हिमालयवासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं।

कस्तूरी मृग का रहस्य:

दुनिया का सबसे दुर्लभ मृग है कस्तूरी मृग। यह हिरण उत्तर पाकिस्तान, उत्तर भारत, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, मंगोलिया में ही पाया जाता है। इस मृग की कस्तूरी बहुत ही सुगंधित और औषधीय गुणों से युक्त होती है, जो उसके शरीर के पिछले हिस्से की ग्रंथि में एक पदार्थ के रूप में होती है। कस्तूरी मृग की कस्तूरी दुनिया में सबसे महंगे पशु उत्पादों में से एक है।

आसमान में लाइट का चमकना:

दावा किया जाता है कि कई बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गई हैं। नासा के वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि हो सकता है कि ऐसा यहां के चुम्बकीय बल के कारण होता हो। यहां का चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण कर सकता है।



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