क्या हुआ जब हवा में छोड़े गये 15 लाख गुब्बारे

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क्या हुआ जब हवा में छोड़े गये 15 लाख गुब्बारे

15 लाख गुब्बारे – बारिश में आकाश से पानी ही जमीन की ओर गिरता है, पर क्या आपने कभी गुब्बारों की बारिश देखी है? यदि नहीं, तो आज हम आपको बता रहें हैं गुब्बारों की बारिश के बारे में, जिसके विषय में आपने शायद पहले कभी नहीं सुना होगा।

हवा में छोड़े गये 15 लाख गुब्बारे

आपको सबसे पहले हम बता दें कि गुब्बारों की यह बारिश अमेरिका के क्लीवलैंड शहर में हुई थी। बात है, 27 सितंबर, 1986 की। असल में हुआ यह था कि इस शहर की संस्था “यूनाइटेड वे ऑफ क्लीवलैंड” ने 15 लाख गुब्बारे एक साथ छोड़े थे, इन गुब्बारो छोड़ने का मकसद सोशल वर्क के लिए पैसे जुटाने और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना था, इसलिए यूनाइटेड वे ऑफ क्लीवलैंड संस्था के ढाई हजार स्वयंसेवकों ने बहुत ही मेहनत से इन गुब्बारों में हवा भरी थी। उद्देश्य तो अच्छा था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।

यूनाइटेड ऑफ क्लीवलैंड ने शहर के पब्लिक स्क्वैयर पर एक बहुत बड़ा स्ट्रक्चर लगाया जिसकी हाईट 250 फीट रखी गयी और उसे नेट से ढक दिया गया। इस नेट के अन्दर षहर के 2500 लोगों में से हर एक ने 800 गुब्बारे में घंटों मेहनत करके हवा भरी और तब जाकर 20 लाख गुब्बारे तैयार हुए। यह संस्था 20 लाख गुब्बारे छोडने वाला थी, लेकिन खराब मौसम की चेतावनी के बाद गुब्बारों की संख्या 15 लाख कर दी गई।

गुब्बारे छोड़ने का यह दिन 27 सितंबर, 1986 था जब सारे गुब्बारे फुला लिए गए, तो नेट खोल दिया गया, जिससे सारे के सारे गुब्बारे एक साथ आसमान में उड़ गए। यह अद्भुत नजारा था। लोग खुशी से तालियां बजा रहे थे। पूरा आसमान रंग-बिरंगे गुब्बारों से ढका था। सोचा गया था कि ये बैलून आसमान में जाकर बिखर जाएंगे और फिर हवा निकलने के बाद धीरे-धीरे गिरकर धरती में मिल जाएंगे। लेकिन मौसम ने सारा खेल बिगाड़ दिया। उस दिन ऐसा तूफान आया कि सारे गुब्बारे ऊपर उडने की बजाए फिर से जमीन और पानी पर गिर गए। ठंडी हवा के दबाव से सारे गुब्बारे शहर में आ गिरे।

अब आप कहेंगे कि गुब्बारे नीचे क्यों आये उन्हें तो ऊपर उड़ जाना चाहिए था, लेकिन आपको बता कि हवा में उड़ने वाले गुब्बारों में हीलियम गैस भरी जाती है जो हवा से काफी हल्की होती है ये गैस गुब्बारे को अपने साथ ऊपर उड़ा ले जाती है। लेकिन जब ये गुब्बारे जैसे जैसे ठण्डी हवा के सम्पर्क में आते हैं तब ये हवा में उड़ नहीं पाते क्योंकि हीलियम गैस के माॅलीक्यूल्स एनर्जी लूस करने लगते हैं जिससे गुब्बारा पहले की तरह भरा नहीं रहता और गुब्बारा नीचे आने लगता है। मौसम की चेतावनी के अनुसार उस दिन ठण्डी हवा का तूफान आया और इसी कारण ठण्डी हवा के सम्पर्क में आने पर सारे गुब्बारे नीचे आने लगे और चारों ओर फैले थे। उनसे गलियां पट गई थीं यही नहीं इन गुब्बारों ने एक रनवे तक जाम कर दिया था। इन गुब्बारों के चलते अगले कुछ दिनों तक क्लीवलैंड शहर में जगह-जगह कचरा बिखरा रहा। बहुत सारे गुब्बारे एरी झील में गिरकर तैरते रहे। इसकी वजह से पुलिस का हेलीकॉप्टर झील में लापता दो मछुआरों को नहीं खोज पाया।

मछुआरों के परिवारों ने यूनाइटेड वे ऑफ क्लीवलैंड पर मुकदमा ठोंक दिया। एक घोड़े के मालिक ने भी केस कर दिया कि गुब्बारों के कारण डरकर उसके घोड़े ने खुद को नुकसान पहुंचा लिया है। संस्था पर और भी मुकदमे हुए। इस घटना को अमेरिका में सबक की तरह लिया गया। इसके बाद से ऐसे किसी आयोजन के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाता है और उसके बाद ही इजाजत दी जाती है।



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