क्या होगा? अगर मानव में आ जायें जानवरों वाले लक्षण Human Animal Hybridization

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ह्यूमन एनिमल ह्यब्रिडाइज़ेशन

आज हम जिस विषय पर बात करने वाले है उस विषय ने विज्ञान के चमत्कार को एक बार फिर से सबके सामने सही साबित कर दिया है। अगर आप भी विज्ञान या फिर इससे जुडी चीजों पर यकीन रखतें है तो यह ख़ास आपके लिए है –

आपने Genes और DNA के बारे में तो जरूर सुना होगा। अगर नहीं सुना तो इसके बारे में संक्षेप जानकारी हम आपको दिए देते है। यह मानव शरीर में ऐसे फैक्टर या गुणसूत्र होते है जो कि बच्चों को उनके माता पिता द्वारा मिलते है। इन्ही जींस के आधार पर माँ के गर्भ में पलने वाले बच्चे का शरीरिक रंग, आकर और फीचर्स तय होते है।

मानव शरीर से केवल मानव की तरह दिखने वाले बच्चे ही पैदा हो सकते है, और पशुओं से सिर्फ पशुओं की तरह दिखने वाले बच्चे ही पैदा होते है। लेकिन विज्ञान ने कुदरत के इस सत्य को भी चैलेंज दे दिया है और रिसर्च शुरू कर दी है। वो भी पशुओं और मानव के जींस को जोड़ कर नई प्रजाति के जीव बनाने की। जी हाँ, वैज्ञानिकों ने इस तकनीक को Hybridization का नाम दिया है ।

अगर आपको भी ऐसा करने का मौका मिले तो आप कौन से जानवर के अंग को अपने में देखना चाहेंगे – किसी पक्षी के पंख, लोमंडी का तेज दिमाग या फिर बिल्ली की तरह तेजी। अगर आपने अब तक ऐसा नहीं सोचा है तो बेहतर होगा कि आप भी इसके लिए खुद को जल्दी बना लें। क्योंकि इस तकनीक की सक्सेस बहुत ही नजदीक है। ऐसा सोचना बहुत ही इंटरेस्टिंग लगता है कि कोई व्यक्ति जिसके अंदर जानवर और आदमी दोनों के लक्षण हो तो वह कैसा लगेगा? देखने में कैसा होगा?

हमारा समाज ऐसे जीवों को कैसे अपनाएगा और किस नजर से देखेगा?

Human Animal Hybridization के Concept को जानने के बाद यह सवाल हर आदमी के दिमाग में होता है। क्योंकि जिस सोसाइटी में हम लोग रहते है वहां पर अगर कोई व्यक्ति नार्मल से अलग दिखे, तो लोग उसको आसानी से Accept नहीं कर पाते। पर अगर हम कहें कि इस तकनीक को अपनाकर किसी मरते हुए व्यक्ति की जान भी बचाई जा सकती है तो इसके बारे में आपका क्या ख्याल होगा?




जेनेटिक साइंस में ऐसे लोगो को काइमेरा का नाम दिया जाता है, जिनमें आदमी और जानवर दोनों के जींस को मिलाकर एक नया Genetic Combination तैयार हो। विज्ञानिको ने पहले से इस कॉम्बिनेशन पर आधारित कुछ एक्सपेरिमेंट्स को किया पर पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। 2019 में एक बायोलॉजिस्ट हीरो मित्सु न कोच्ची ने इस साइंस पर एक एक्सपेरिमेंट करने के लिए जापानी सरकार से मांग की।

इस एक्सपेरिमेंट में वह मानव कोशिका को पशु भ्रूण में विकसित करवाना चाहते थे। बाद में वह भ्रूण को किसी सरोगेट पशु के शरीर में रखना चाहते थे, ताकि उनको यह पता चल सके कि क्या पशु शरीर में मानव कोशिका अच्छी तरह से विकसित हो सकती है या नहीं? और इस कांसेप्ट को Xero Transplantation नाम दिया गया था। अब इसी तकनीक को बेस बनाकर और ह्यूमन स्टेम सेल्स का इस्तेमाल करके मानव शरीर के नए अंग विकसित करने का प्लान है। यह तकनीक अगर सफल हो जाती है तो उन लोगों को बहुत फायदा मिलेगा जो ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन चाहते हैं। अगर यह तकनीक सफल हो जाती है तो हर वर्ष करीब 8000 लोगो की जान बचाई जा सकती है।

इस तकनीक का फायदा जानते हुए भी सरकार इस तकनीकों को इतना प्रोत्साहन नहीं दे रही। हो सकता है सरकार नैतिक दुविधा का सामना करने के लिए तैयार न हो। या फिर हो सकता है कि इस के पीछे की वजह जानवरो की जिंदगी को नुक्सान न पहुँचने देना हो। इतना ही नहीं कुछ विशेषज्ञ मानते है कि इसके पीछे का कारण अगर कोई नई प्रजाति विकसित होती है, तो हो सकता है हम उस के भरण पोषण का सही से इंतजाम न कर पाएं। क्यंकि यह तकनीक पूरी तरह डीएनए में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आएगी। शायद इसी वजह से इस तकनीक में आजतक बहुत बड़ी सफलता हाथ नहीं लग पायी। वैज्ञानिक मानते हैं इस तकनीक को छोड़कर हमें लैब में नए ऑर्गन विकसित करने के बारे में सोचना चाहिए। Human Animal Hybridization अपने आप में बहुत बड़ी क्रांति होगी।

तो दोस्तों आज का आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट जरूर करें। आर्टिकल से सम्बंधित कोई सवाल जबाब है तो पूछ सकते हैं।



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