जब जीतने की चाह में बेईमानी पर उतरे खिलाडी

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नमस्कार दोस्तों, देखिए माचो फॅक्ट पर हम आपके लिए एक और अच्छा आर्टिकल लेकर हाजिर हैं। दोस्तों खेलने का शौक किसको नही होता। बचपन में हम सभी यही सपना देखते हैं क़ि एक दिन हम भी एक महान खिलाड़ी बनेंगे लेकिन बड़े होते-होते ये सारे सपने एक-एक से टूट ही जाते हैं। खैर हम दूसरे खिलाड़ियों को देखकर ही अपने सपनों को जी लेते है। दोस्तों खिलाड़ियों की फ़ैन फॉलोयिंग लाखों और करोड़ों में होती है लेकिन जब वही खिलाड़ी खेल में बेईमानी करके जीतने की कोशिश करते हैं, तो हमें भी बहुत दुख होता है। चलिए आज आपको बताते हैं ओलिंपिक खेलों के इतिहास के कुछ ऐसे ही खिलाड़ियों के बारे में जिन्होने बेईमानी से जीतने की कोशिश की—

मेरियन जोन्स (Marian Jones)


सन् 2000 में हुए सिडनी ओलंपिक्स में अमेरिका की महिला धावक मेरियन जोन्स ने तीन गोल्ड और दो ब्रॉन्ज़ मेडल जीत कर सनसनी मचा दी। इससे पहले किसी भी महिला ने इतने सारे मेडल एक ही ओलंपिक में नही जी।ते थे जोन्स पर स्टेरॉइड (Steroids) मतलब कि अवैध दवाओं का सेवन करके जीतने के आरोप लगने लगे। लेकिन उन्होने ऐसे किसी भी आरोप को सिरे से नकार दिया और क्योंकि उनका नाम पहले कभी ऐसी चीज़ों में नही आया था, तो किसी ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नही दिया। लेकिन सन् 2007 में उन्होने खुद एक खेल से जुड़ी संस्था के सामने ये बात कबूल की कि वे सिडनी ओलंपिक्स के बहुत पहले से ही लगातार स्टेरॉइड्स ले रही थीं। उनके सारे ओलंपिक मेडल उनसे छीन लिए गये और उन्हे छः महीने की जेल में भी रहना पड़ा।

8 बॅडमिंटन खिलाड़ी (Eight Badminton players)


2012 लंडन ओलंपिक्स के दौरान बेडमिंटन के कोर्ट से एक अजीब-सा वाक़या सामने आया। चीन साउथ कोरिया और इंडोनेशिया के आठ बेडमिंटन खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से तब निकाल दिया गया जब उनपर मैच फिक्सिंग के आरोप लगने लगे। दरअसल बॅडमिंटन के डबल्स में नियम कुछ इस प्रकार के थे कि कई टीमों को अपना मैच हारने में ज़्यादा फ़ायदा दिखा। जो टीम मैच हारकर अगले राउंड में प्रवेश करती थी, उसे आसान प्रतिद्वंदी से खेलने का मौका मिलता था, जिसे हराकर वो आसानी से अगले राउंड में पहुँच सकते थे। बस इन खिलाड़ियों ने इसी बात का फायदा उठने की कोशिश की और जानबूझकर अपने मैच हार गये। इन खिलाड़ियों की इस हरकत को खेल भावना के विरुद्ध माना गया और बेडमिंटन के खेल का अपमान करने के आरोप में उन्हे प्रतियोगिता से निकाल दिया गया।

ईस्ट जर्मनी की महिला लूज खिलाड़ी (East Germany female Luger players)


दोस्तों लूज एक खेल है जिसमें बर्फ पर स्केटिंग करनी होती है। ईस्ट जर्मनी की लूज खिलाड़ी ऑर्ट्रन एन्दरलें (Artron Enderlein) भी 1968 में फ्रांस के ग्रिनोबल (Grenoble) में हुए खेलों का हिस्सा थीं। एन्दरलें ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता जबकि ईस्ट जर्मनी की ही उनकी साथी खिलाड़ी दूसरे और चौथे स्थान पर रहीं। यहाँ तक तो बात ठीक थी लेकिन कई खिलाड़ियों ने इस बात पर गौर किया कि ईस्ट जर्मनी की ये तीनों महिला खिलाड़ी अपनी रेस के कुछ सेकेंड पहले ही पहुँचती थीं और रेस ख़त्म होते ही वहाँ से गायब हो जाती थीं। बाद में ये पता चला कि ये तीनों अपने स्लेड्ज (Sledge) पर एक केमिकल का प्रयोग कर रहीं थीं जिसके कारण उन्हे बर्फ पर तेज़ी से स्केटिंग करने में मदद मिल रही थी। ये सब पता चलने के बाद तीनों ही लूज खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से बाहर निकाल दिया गया।

रशिया के खिलाड़ी (Russian athletes)


दोस्तों, सन् 2015 में हुए सोची विंटर ओलंपिक्स (Sochi Winter Olympics) के दौरान रशिया के खिलाड़ियों पर बेईमानी करने और ड्रग टैस्ट में गड़बड़ी करने के आरोप लगने लगे। कुछ लोग तो ये मानते थे कि इसमे रशिया की सरकार और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) का भी हाथ है। इसके बाद रशिया को दुनियाभर में होने वाली सभी खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने से बैन कर दिया गया। यहाँ तक कि वे 2016 के रियो ओलंपिक (Rio Olympics) में भी भाग नही ले सकते थे। लेकिन ब्राज़ील के रियो में होने वाले ओलंपिक्स की शुरुआत के एक दिन पहले ही रशिया ने ये अपील की कि उनके खिलाड़ियों को ओलंपिक में भाग लेने की इजाज़त मिले। आख़िरकार रशिया के 272 खिलाड़ियों को रियो ओलंपिक्स में भाग लेने ही इजाज़त दे दी गयी वहीं 117 खिलाड़ी ऐसे भी थे जिन्हे ड्रग्स या स्टेरॉइड लेने के आरोप में बैन कर दिया गया।

डोरा रत्जेन (Dora Ratjen)


सन् 1936 के बर्लिन ओलम्पिक्स (Berlin Olympics) में जर्मनी की डोरा रत्जेन महिलाओं की हाई जंप प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर आईं। लेकिन कुछ ही समय बाद जब उन्होने युरोपियन एथलाटिक्स (European Athletics) प्रतियोगिता में भाग लिया तो वो आसानी से गोल्ड मेडल जीत गयी। इसके बाद कई लोगों ने उनपर बेईमानी से जीतने के आरोप लगाने शुरू कर दिए। लेकिन जब डोरा की जाँच की गई तो कुछ ऐसा पता चला जिसपर विश्वास करना मुश्किल था। दरअसल डोरा रत्जेन महिला नही बल्कि एक पुरुष थीं। डोरा के बचपन में उसके जननांग इतने छोटे थे कि सभी लोग उसे लड़की ही समझते थे। जब डोरा को असलियत पता चली तो उन्होने पूरी जिंदगी औरत बनकर ही जीने का फ़ैसला किया। डोरा से उनका मेडल छीन लिए गया और उनपर आजीवन बैन लगा दिया गया। हालांकि उनकी स्थिति को देखते हुए उनपर कोई क़ानूनी कार्यवाही नही की गयी।

तो दोस्तों ये थे कुछ ऐसे खिलाड़ी जिन्होने ओलंपिक खेलों के दौरान बेईमानी से जीतने की कोशिश की।
दोस्तों एक बात कहना चाहूँगा। सफलता का एक ही मंत्र है सत्य, मेहनत और लगन। इनके बिना कोई भी सफलता प्राप्त नही कर सकता। इस विषय पर आपके क्या विचार हैं? हमें कमेंट करके ज़रूर बताएँ



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