झाइयां क्या हैं? झाइयां क्यों होती हैं? झाइयों को दूर करने के उपाय

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झाइयां क्या हैं? झाइयों को दूर करने के उपाय

हर किसी को अपने चेहरे की चिंता रहती है, क्योंकि चेहरे से किसी के भी Personality का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। वहीं, आजकल धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कारण हमारा चेहरा रूखा और बेजान होने लगा है। पिंपल, काले दाग-धब्बे और झाइयां चेहरे की ख़ूबसूरती को बिगाड़ रहे हैं। ऐसे में समय रहते चेहरे पर ध्यान देना ज़रूरी है। चलिए आज हम बात करते हैं झाइयों के बारे में –

झाइयां किसे कहते हैं? 

त्वचा पर पड़ जाने वाले काले धब्बों को झाइयां कहते हैं। इसे हाइपरपिगमेंटेशन भी कहा जाता है। ये निशान बड़े या छोटे कैसे भी हो सकते हैं। हालांकि, ये हानिकारक नहीं हैं, लेकिन किसी मेडिकल समस्या के लक्षण हो सकते हैं। ये आपकी त्वचा के खराब और अस्वस्थ दिखने का कारण बन सकते हैं।

झाइयों के पीछे साइंटिफिक कारण? 

आपको बता दें कि मेलानोसाइट्स नामक सेल के चलते त्वचा का रंग बनता है। मोलानोसाइट्स के कारण मेलानिन पैदा होते हैं, जिससे त्वचा को अपना अलग रंग मिलता है। वहीं, जब मेलानोसाइट्स Damaged और Unhealthy हो जाते हैं, तो ज्यादा मात्रा में मेलानिन निकलने लगता है और त्वचा काली पड़ने लगती है।

मेलानोसाइट्स के Damage होने के बहुत से कारण होते हैं। कभी-कभी यह बढ़ते धूल और प्रदूषण के कणों के इकट्ठा होने की वजह से हो जाता है। तो कई बार हार्मोनल चेंज होने की वजह से हो जाता है। यह Harmonal Changes ज्यादातर लड़कियों में पाए जाते हैं। औरतों में खासकर उनकी प्रेगनेंसी के टाइम यह मेलेनिन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, इसलिए उनकी त्वचा पर काले धब्बे यानी की झाइयां देखने को मिलती है। पर जैसे ही उनकी डिलीवरी होती है यह पिगमेंट्स या काले धब्बे अपने आप खत्म हो जाते हैं। मर्दों में यह Problem बहुत कम देखी जाती है। 

अलग तरीके की झाइयाँ

यह 2 तरीके के होते हैं हाइपोपिगमेंटेशन और हाइपरपिगमेंटेशन। 

हाइपरपिगमेंटेशन ऐसी कंडीशन है जिसमें आपके शरीर अथवा चेहरे पर सफेद रंग के धब्बे आ जाते हैं। यह प्रॉब्लम ज्यादातर महिलाओं व बच्चों में देखी जाती है।  इसके पीछे एक कारण है धूप में घूमना। कई बार हम इस चीज पर ध्यान नहीं देते कि हमारा बच्चा धूप में घूमने की वजह से किसी एलर्जी का शिकार हो रहा है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा अगर बाहर जाए और उसे ऐसी प्रॉब्लम है। तो हो सके तो उसे सनस्क्रीन लोशन या फिर कोई मॉइश्चराइजर लगाकर ही बाहर भेजें। 

कई बार इसकी वजह विटामिन और कैल्शियम की कमी भी जानी जाती है, इसलिए डॉक्टर कोई कैलशियम सप्लीमेंट बच्चे को दे देते हैं। महिलाओं में भी कैल्शियम की कमी होना कॉमन प्रॉब्लम है, इसलिए उनमें भी सफेद दाग बड़ी आसानी से देखे जा सकते हैं। 

सबसे खास बात को कई बार हाइपोपिगमेंटेशन को विटिलिगो की समस्या यानी की फुलवारी की समस्या के साथ कंपेयर किया जाता है। पर हाइपोपिगमेंटेशन और फुलवारी दोनों अलग-अलग बीमारियां है। फुलवारी के बीमारी में Vells में से मेलेनिन बिल्कुल ही खत्म हो जाता है। बल्कि हाइपोपिगमेंटेशन के केस में मेलेनिन की संख्या कुछ हद तक कम होती है। हाइपरपिगमेंटेशन में यह धब्बे काले अथवा ब्राउन रंग के होते हैं। इन्हे डार्क स्पॉट्स भी कहा जाता है। इसकी वजह धूप से पढ़ने वाली, किरणें मेलेनिन का ज्यादा बढ़ना या फिर किसी तरीके की स्किन एलर्जी हो सकती है। 

झाइयों के पीछे का कारण

अपनी झाइयों के पीछे के कारण को जानने के लिए खुद से ये सवाल करें:

  • क्या आप बार-बार टैनिंग बेड्स (Tanning Beds) का उपयोग करते हैं या धूप में जाने पर आपकी त्वचा गहरे भूरे रंग की या टैन (Tan) हो जाती है? अगर आप तेज़ धूप के संपर्क में रहते हैं और सनस्क्रीन का अधिक उपयोग नहीं करते तो आपको डार्क स्पॉट्स हो सकते हैं। स्थानीय उपचारों और धूप के संपर्क में न आने से इस प्रकार के हाइपर पिगमेंटेशन से छुटकारा पाया जा सकता है।
  • क्या वर्तमान समय में आप किसी बिमारी से ग्रसित हैं जिसके लिए आप दवाइयां ले रहे हैं? क्या आप गर्भवती हैं? बर्थ कंट्रोल पिल्स का प्रयोग करती हैं? या हार्मोन थेरेपी ले रही हैं? अगर ऐसा है तो आपको मेलेनोमा होने की सम्भावना है।
  • क्या आपको गंभीर प्रकार के मुहांसे, प्लास्टिक सर्जरी या अन्य लम्बे समय तक रहने वाली त्वचा की कोई बीमारी थी? ऐसा है तो आपको पोस्ट इंफ्लेमेटरी हाइपर पिगमेंटेशन हो सकता है जो स्थानीय उपचारों से ठीक किया जा सकता है।

घरेलू उपायों से दूर करें झांइयों की समस्या:

सबसे पहले हम बात करेंगे कुछ घरेलू उपायों और हाइपरपिगमेंटेशन की जिनको इस्तेमाल करके आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। 

 

घरेलू उपाय

नीम की पत्ती – नीम की पत्ती कई सारी बीमारियों का घरेलू उपचार है। इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे दाग वाले हिस्से पर लगाएं। नीम की पत्तियों के जूस में शहद मिलाकर पीना भी लाभकारी होगा। जल्द असर के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। ये ब्लड प्यूरीफाई का काम करता है।

ऐलोवेरा जेल – ऐलोवेरा की पत्तियों के अंदर के जेल को निकालकर सफेद दाग वाले हिस्से पर लगाएं और अच्छे से मसाज करें। सूखने पर इसे पानी की सहायता से धो लें। दिन में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करें। ऐलोवेरा जूस पीना भी फायदेमंद होता है।

नारियल तेल – यह त्वचा को पुन: वर्णकता प्रदान करने में सहायक है साथ ही त्वचा के लि‍ए बेहतर। इसमें जीवाणुरोधी और संक्रमण विरोधी गुण भी पाए जाते हैं। प्रभावित त्वचा पर दिन में 2 से 3 बार नारियल तेल से मसाज करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

हाइपरपिगमेंटेशन

  1. एक पके हुए टमाटर को लेकर उसका रस निकाल लें। इसमें तुलसी के कुछ पत्तों का रस निचोड़कर मिला लें। इस मिश्रण को झांइयों के ऊपर लगाएं। रूई के टुकड़े की मदद से दिन में तीन से चार बार इस मिश्रण को प्रभावित जगह पर लगाएं। आपको कुछ दिनों में ही फर्क नजर आने लगेगा।
  2. मुलतानी मिट्टी में नींबू का रस, गुलाब जल मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को झांइयों पर लगाएं। कुछ ही दिनों में अंतर नजर आने लगेगा। पर अगर आपकी स्क‍िन ड्राई है तो दिन में एक बार से अधिक इसका इस्तेमाल न करें।
  3. झांइयों पर बादाम का तेल लगाना भी फायदेमंद होता है। बादाम के तेल में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिला लें। इसे कॉटन की मदद से प्रभावित जगह पर लगाएं। ये एक बेहद कारगर उपाय है।
  4. झांइयों से छुटकारा पाने के लिए कच्ची हल्दी का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद है। कच्ची हल्दी को अच्छी तरह पीस लें। इसमें कुछ मात्रा में मलाई मिला लें। जब दोनों चीजे आपस में अच्छी तरह मिल जाएं तो इस पेस्ट को झांइयों पर लगाएं। कुछ ही दिनों में अंतर नजर आने लगेगा।
  5. आप चाहें तो पिसे हुए बादाम में नींबू का रस या फिर संतरे के छिलके का पाउडर मिला सकते हैं। इस मिश्रण में कच्चा दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएं। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।

कुछ जरूरी चेतावनियाँ

  • अपने चेहरे पर खट्टे फलों का रस लगाकर धूप में न निकलें क्योंकि इसके कारण स्किन जल सकती है। 
  • जब आप घर पर डार्क स्पॉट्स हटाने का उपचार का उपयोग करें तो हमेशा पैकेज पर लिखे निर्देशों का पालन        करें।
  • किसी भी प्रकार के स्किन के रंग को हल्का करने वाले प्रोडक्ट को लगाने पर खूब सारा सनस्क्रीन लगायें
  • गर्भवती या बच्चे को दूध पिलाने वाली माताओं को सैलिसिलिक एसिड का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  • हाइड्रोकुइनोन, जिसे स्किन लाइटनिंग प्रोडक्ट (Skin Lightening Product) के नाम से भी जाना जाता है,        कैंसर, पिगमेंट कोशिकाओं की क्षति, डर्मेटाइटिस या अन्य त्वचीय समस्याओं से सम्बंधित है।
  • जब तक अन्य विकल्पों से परिणाम न मिलें तब तक अधिकतर स्किन केयर विशेषज्ञ इसके उपयोग की                सिफारिश नहीं करते।
  • अगर आपको एस्पिरिन (Aspirin) से एलर्जी हो तो सैलिसिलिक एसिड युक्त प्रोडक्ट्स का उपयोग न करें।

 



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