पनडुब्बी क्या है कैसा होता है पनडुब्बी में जीवन What is a submarine, how is life in a submarine

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पनडुब्बी क्या है कैसा होता है पनडुब्बी में जीवन

भारत की सुरक्षा के लिए अलग अलग जगह से सैनिक सेवा में रहते हैं। इन Life Safer को अलग अलग सेना शक्तियों में CATEGORIZED किया गया है। आर्मी, नेवी, एयर फाॅर्स, आर्मी को थल सेना, नेवी को जल सेना और एयर FORCE को वायु सेना कहा जाता है। देखा जाएं तो यह तीनो ही फोर्सेज हमारी सुरक्षा के लिए जी तोड़ कर मेहनत करते है। लेकिन एक अलग तरह का डिवाइस है जो की सिर्फ नेवी ही USE करती है। उस स्पेशल डिवाइस का नाम है पनडुब्बी (सबमरीन)।

इस डिवाइस में नाविक या फिर सैनिक कई कई दिनों तक धरती के जीवन से दूर पानी के अंदर रहते हैं। इस आर्टिकल को पोस्ट करने का Motive है देश के सैनिको के द्वारा किये जाने वाले हार्डवर्क को दुनिया के सामने दिखाना ताकि हम लोग सैनिको के लिए और ज्यादा Supportive बन सकें। तो चलिए शुरू करते है –

देश के नौ-सैनिक देश की सुरक्षा के लिए दो अलग अलग जगह से काम करते हैं। पहले लेवल में यह देश को पानी के ऊपर रह कर सर्विसेज देते हैं। तो दूसरा यह देश को समुन्द्र में वाटर लेवल के 1000 फीटस नीचे रहते हुए सर्विसेज देते हैं। इन सर्विसेज के लीये सैनिको को कुछ स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है और उनको टफ कम्पटीशन से गुजर कर निकलना पड़ता है। इस कम्पटीशन को क्लियर करने वाले सैनिक ही इन सर्विसेज केलिए चुनें जाते हैं। सिलेक्शन के बाद इनको नौ-सैनिक के तौर पर अलग अलग Duties सौंप दी जाती हैं।

नौ-सैनिकों का जीवन आसान नहीं होता। इनके परिवार वाले बताते हैं कि इनकी ज़िंदगी बड़ी कठिन होती है। जब वो किसी मिशन पर जाते हैं, तो ये मिशन 20 या 30 दिन के लिए होता है। और कभी-कभी तो लगातार 45 दिन तक वो काम करते हैं।

परिवार वालों को बस इतना पता होगा है कि वो ड्यूटी पर जा रहे हैं। इससे ज्यादा और कोई जानकारी नहीं होती है। परिवार को ये भी पता नहीं होता है कि वो कितने दिन के लिए कहां जा रहे हैं और कब वापस आएँगे।

उनके अभियान की जानकारी सिर्फ नौ-सेना के Head Office को होती है। नौ-सैनिक अपने परिवार से दूर पानी के भीतर रहते हैं। जब वो पनडुब्बी के भीतर होते हैं तो नहाना तो दूर, दाढ़ी बनाने का मौका भी उन्हें नहीं मिलता है।
उनकी लाइफ मुश्किल हो भी क्यों न आखिर किसी भी देश के लिए सबसे खतरनाक हथियार उस देश की पनडुब्बी ही होती है। इन पनडुब्बियों की स्पेशिलिटी यह है की इनमें कुछ बड़े हथ्यार और मिसाइल मोजूद होती हैं। किसी भी नार्मल इंसान को यही लगता है की जो भी लोग इन पनडुब्बियों में सवार होते हैं। शायद उनको कुछ स्पेशल सेवाएं मिलती हैं। पर उन सब लोगो की इस गलतफहमी को दूर करने के लिए हम यह बता दें, की इन नौसैनिकों कई कई दिनों के लिए मिशन पर भेज दिया जाता है, उस पुरे समय यह सिर्फ पानी के अंदर ही रहते हैं।

नौ-सैनिक अगर 30 दिन के लिए पनडुब्बी में हैं तो उन्हें मुश्किल से तीन बार नहाने का मौका मिलता है, और वो भी सबकी सहमति के बाद। क्योंकि हर नौसैनिक को प्रतिदिन तीन से चार मग पानी मिलता है। ब्लेड जैसी चीज का इस्तेमाल करना सख्त मना है, इसलिए जितने भी दिन वो पानी के अंदर हैं। उन्हें बिना दाढ़ी बनाए ही रहना पड़ता है। पनडुब्बी के अंदर SUNLIGHT का कोई भी SOURCE नहीं होता है। इसके चलते जब वो समुद्र की सतह पर आती है तो बाहर आते वक्त नौसैनिकों को हाथ-पैर में जकड़न जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। इनके कपडे एक ही तरीके के होते हैं और यह कपड़े डिस्पोजेबल होते हैं। इसके लिए भी एक ख़ास रीज़न है, क्योंकि इन कपड़ो के ऊपर स्पेशल केमिकल लगा होता है। जो इन नौसैनिकों को किसी भी तरीके के इन्फेक्शन्स और एलर्जी से दूर रख के हाइजीन मेन्टेन रखने में HELP करता है।

बहार से बड़ी दिखने वाली पनडुब्बी के अंदर सोने के लिए सिर्फ दो ही कंपार्टमेंट होते हैं। वहां का Temperatur होता है, इसलिए कभी-कभी कुछ नौसैनिक वहां भी सोने जाते हैं, लेकिन जहां मिसाइल और टारपीडो रखे होते हैं। ये जगह पनडुब्बी की दूसरी जगहों के मुकाबले सबसे ज्यादा ठंडी होती है। पनडुब्बी के अंदर स्लीपिंग टाइम भी शिफ्ट्स में डिवाइड किया जाता है। क्योंकि ज्यादा जगह न होने की वजह से उनको ऐसी एडजस्टमेंट करनी पड़ती है।

पनडुब्बी जब भी समुद्र के अंदर जाती है, तो उसके साथ डॉक्टर और प्राथमिक चिकित्सा का सामान साथ होता है। क्योंकि अगर किसी को उल्टी या चक्कर जैसी परेशानी होती है तो तुरंत इलाज किया जा सके। पानी में चलते समय पनडुब्बी बहुत ही जयादा आवाज करती है। इसलिए नौ-सैनिकों को अपने कानो का ध्यान रखने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है।

पनडुब्बी में जाते समय कुछ लिमिटेड अमाउंट का फ़ूड ही Carry किया का सकता है। इसलिए खाने पीने के समान का बहुत ही ध्यान से इस्तेमाल किया जाता है। खाना पकाते समय कम आग और मिर्च मसाले का इस्तेमाल किया जाता है।ताकि Submarine में ज्यादा धुयाँ न उठे। इसलिए नौ-सैनिकों को लिमिटेड और सादा भोजन ही खाने को मिलता है।

ऐसी Tough Situation का सामना करते हुए भी यह नौसैनिक कभी भी अपने फ़र्ज़ से नहीं चूकते। यह लोग हमेशा देश की सेवा में लगे रहते है। इनकी इस सेवा भाव को देखते हुए हमारा भी यह फ़र्ज़ बनता है, की हम इनके स्ट्रांग जज्बे की रेस्पेक्ट करें और इनको सलाम करें।



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