प्लूटो का रहस्य—प्लूटो ग्रह का क्या हुआ?

Must read



प्लूटो का रहस्य—प्लूटो ग्रह का क्या हुआ?

हमारा सौर मंडल! एक सूरज और उसके चारों ओर घूमते 8 ग्रह। उनके चंद्रमा, ग्रहिकाएँ, उल्का पिंड, धूमकेतु, और ना जाने क्या-क्या। अपने आप में अनगिनत रहस्यों को छुपाएँ हुए है। सौर मंडल का ऐसा ही एक रहस्य है – प्लूटो । जी हाँ, वही प्लूटो जो पहले हमारे सौर मंडल का 9वा ग्रह हुआ करता था।

अब सवाल उठता है कि फिर ऐसा क्या हुआ, कि बचपन में जिन 9 ग्रहों के बारे में पडा था वो 8 ही रह गये? क्या प्लूटो ख़त्म हो गया? क्या किसी ने इसे तबाह कर दिया? ऐसे ही ना जाने कितने प्रश्न हमारे दिमाग़ में घूमते रहते है?

नमस्कार दोस्तों, “अनसुनी कहानियाँ” की इस रहस्यमयी दुनिया में आपका स्वागत है। आज हम आपके लिए प्लूटो से जुड़ीं ऐसी अनसुनी कहानियाँ लाये है, जो इसके अस्तित्व और रहस्यों को उजागर करेंगीं।

प्लूटो ग्रह की जानकारी

सन् 1840, सौर मंडल में अबतक केवल 7 ही ग्रह खोजे गये थे। और वैज्ञानिक यूरेनस मतलब अरुण ग्रह के बारे में और जानने का प्रयास कर रहे थे। तभी एक दिन वैज्ञानिकों ने पाया कि कोई चीज़ तो है, जो यूरेनस की कक्षा में गड़बड़ी उत्पन्न कर रही है। वो चीज़ थी सौर मंडल का 8वा ग्रह नेपच्यून, यानी वरुण ग्रह।

कई दशकों तक नेपच्यून पर किए गये अध्ययन के बाद पता चला, सिर्फ़ नेपच्यून ही यूरेनस की कक्षा में हो रही गड़बड़ी का कारण नही था। बल्कि एक और ग्रह भी था, जो यूरेनस की कक्षा में प्रभाव डाल रहा था।

सन् 1906 में, पर्सिवल लोवेल नाम के एक व्यक्ति ने अमेरिका के अरिज़ोना में एक अब्ज़र्वेटरी स्थापित की। और उस 9वे ग्रह की खोज शुरू कर दी। जिसको उन्होने नाम दिया – “Planet X”।  लोवेल ने लगभग 10 साल तक अपनी खोज जारी रखी, लेकिन 1916 में उनकी मृत्यु हो गयी। और कुछ क़ानूनी विवादों के कारण 1929 तक प्लॅनेट X एक रहस्य ही बना रहा ।

इसके बाद लोवेल की अब्ज़र्वेटरी की कमान संभाली 23 साल के वैज्ञानिक क्लाइड टॉमबघ (Clyde Tombough) ने, 18 फ़रवरी 1930 को प्लॅनेट X की खोज समाप्त हुई। और क्लाइड टॉमबघ ने एक ग्रह को ढूँढ निकाला, जिसे आज हम प्लूटो कहते हैं। दुनिया भर में ये खबर फैल गयी और हज़ारों लोगों ने इस नये ग्रह का नाम रखने के लिए अपनी राय भेजना शुरू कर दिया।

आपको जानकर हैरानी होगी कि प्लूटो का नाम ऑक्स्फर्ड, इंग्लेंड में रहने वाली 11 साल की एक लड़की, वेनएटिया बर्नी ने रखा था। ग्रीक पौराणिक कथाओं में प्लूटो, मृत्यु के बाद की दुनिया के देवता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में मृत्यु के देवता यम हैं। इसलिए हिन्दी में प्लूटो को यम नाम दिया गया है। लेकिन आख़िर प्लूटो के खोजकर्ताओं को यही नाम अच्छा क्यों लगा? इसका कारण है कि प्लूटो के शुरुआती दो अक्षर, यानी P और L  पर्सिवल लोवेल के नाम का संक्षिप्त रूप हैं।

 

248 साल में काटता है सूर्य का चक्र

कहा जाता है कि पर्सिवल लोवेल की खोज में भी प्लूटो की तस्वीरें मिल गयीं थी, लेकिन उस समय वे ये अनुमान नही लगा सके कि यही प्लॅनेट X हो सकता है। खैर अब सौरमंडल में 9 ग्रह खोजे जा चुके थे। और प्लूटो के बारे में और जानने की कोशिशे शुरू हो गयीं । नेपच्यून की कक्षा के पार कुपीएर बेल्ट (Kupier Belt) कहलाने वाली जगह में स्थित है। प्लूटो मुख्य रूप से नाइट्रोजन, मिथेन और कार्बन-मोनो‌-ऑक्साइड से बना हुआ है। और यहाँ का तापमान बहुत ही कम है।

प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल लगते हैं, जो किसी भी ग्रह की तुलना में सबसे ज़्यादा हैं। इसकी कक्षा भी दूसरे ग्रहों की तुलना में ज़्यादा अंडाकार और बहुत ही विलक्षण है। कई बार ये नेपच्यून की तुलना में सूर्य से ज़्यादा करीब आ जाता है। प्लूटो के 5 चंद्रमा खोजे जा चुके है, जिनमे शैरन सबसे बड़ा है। प्लूटो का आकार हमारी पृथ्वी के चंद्रमा के बराबर है।

प्लूटो को क्यों हटाया गया

नासा ने प्लूटो के बारे में और विस्तार से जानने के लिए कई अंतरिक्ष मिशन भी शुरू किए है। कई दशकों तक प्लूटो के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास चलता रहा। लेकिन सन 2006 में इंटरनॅशनल आस्ट्रनॉमिकल यूनियन (IAU) ने चेक रिपब्लिक के प्राग में एक बैठक की, और प्लूटो को ग्रहों की श्रेणी से हटा दिया। आख़िर ऐसा क्या हुआ कि एक ही दिन में प्लूटो ग्रह नही रहा? क्या प्लूटो ख़त्म हो गया? क्या प्लूटो को तबाह कर दिया गया?  नही दोस्तों ऐसा कुछ भी नही है। प्लूटो का अस्तित्व अभी भी है। बस इसे ग्रहों की श्रेणी से हटा कर ड्वॉर्फ प्लॅनेट या बोना ग्रह मान लिया गया है।

दरअसल, प्लूटो की खोज के समय की गयीं इसके मास और आकार की गणना बाद में हुईं उन्नत, खोजों से ग़लत साबित हो गयीं। पहले ये माना जाता था कि प्लूटो मर्क्युरी (Mercury) से आकार में बड़ा है और इसका मास पृथ्वी के मास के बराबर हो सकता है।

लेकिन ये दोनों ही बातें ग़लत निकलीं। 2005 में कुपीएर बेल्ट पर एरिस नाम का एक और पिंड खोज लिया गया। ये भी माना जाने लगा कि प्लूटो वो प्लॅनेट X नही है, जिसकी खोज पर्सिवल लोवेल कर रहे थे। 2006 में हुई बैठक का एक कारण ये भी था, कि खगोलविदों में इस समय तक ग्रह की परिभाषा को लेकर एकमत नही था। प्राग में हुई इस बैठक में किसी भी पिंड को ग्रह मानने के लिए तीन नियम रखे गये–

  1. एक पिंड तभी ग्रह होगा अगर वो सूर्य की परिक्रमा करता हो।
  2. ग्रह का गुरुत्वाकर्षण बल इतना होना चाहिए कि वो अपना आकार लगभग गोल बनाए रखे।
  3. ग्रह को इतना विशाल होना चाहिए कि वो अपनी कक्षा को साफ रखे। इसका मतलब ये है कि अगर कोई पिंड या ग्रहिका ग्रह की कक्षा में आए, तो ग्रह उसे या तो नष्ट कर दे। या वह चीज़ ग्रह की परिक्रमा करना शुरू कर दे।

शुरुआती 2 शर्तों पर तो प्लूटो पूरी तरह खरा उतरता है, लेकिन तीसरी शर्त पर नही। इसीलिए प्लूटो को ग्रहों की श्रेणी से हटा कर ड्वॉर्फ प्लॅनेट, या बोने ग्रहों की श्रेणी में डाल दिया गया। जो पिंड केवल शुरुआती दो नियमों का ही पालन करते हैं, उन्हें ड्वॉर्फ प्लॅनेट कहते हैं। प्लूटो का मास अपने आस-पास की चीज़ो का सिर्फ 0.07 % है। जबकि पृथ्वी का मास अपने आस पास की चीज़ो से 17 लाख गुना ज्यादा है।

वैसे प्लूटो का एक ड्वॉर्फ प्लॅनेट होना भी उसके लिए कोई अपमान की बात नही है। हमारे सौरमंडल में 44 ड्वॉर्फ प्लॅनेट अभी तक खोजे जा चुके है। और प्लूटो उनमे से आकार में सबसे बड़ा और मास में दूसरा सबसे बड़ा ड्वॉर्फ प्लॅनेट है। सन् 2006 में नासा ने, नेपच्यून के पार कुपीएर बेल्ट का अध्ययन करने के लिए न्यू होराइज़न मिशन की शुरुआत की। 2015 में ये अंतरिक्ष यान प्लूटो के उपर से गुजरा, और किसी ड्वॉर्फ प्लॅनेट की खोज करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया।

इस अंतरिक्ष यान से प्लूटो की खोज करने वाले खगोलविद क्लाइड टॉमबघ की अस्थियों की राख को भी ले जाया गया था। सुनने में ये बात बहुत ही अजीब लगती है। लेकिन अंतरिक्ष की दुनिया में दिन-रात खोज में लगे हुए वैज्ञानिकों के लिए ये बहुत ही सम्मान की बात है।

वैसे इंटरनॅशनल आस्ट्रनॉमिकल यूनियन के द्वारा, 2006 में लिए इस फ़ैसले का विरोध करने वालों की भी कमी नही हैं। न्यू होराइज़न मिशन के प्रमुख इन्वेस्टिगेटर एलन स्ट्र्न (Alan Stern) कहते हैं, कि 2006 में IAU के द्वारा दी गयी ग्रह की परिभाषा के अनुसार- पृथ्वी, मंगल, जूपिटर और नेप्टुन कोई भी ग्रह नही हैं। क्योंकि इनकी कक्षा में बहुत सी ग्रहिकाएँ हैं।

दूसरी बात ये भी है कि 2006 की बैठक में केवल दुनिया के 5% खगोलविद ही शामिल हुए थे। और उनके द्वारा दिए हुए फ़ैसले को सारी खगोलविद समाज का फैसला नही समझा जा सकता है। अमेरिका के कई राज्यो ने IAU के इस फ़ैसले को मानने से इंकार कर दिया। और क्लाइड टॉमबघ के सम्मान में प्लूटो को ग्रह का दर्जा देने वाला बिल पास कर दिया।

इन सब को देखते हुए ये लगता है, आने वाले भविष्य में प्लूटो को ग्रहों की श्रेणी में फिर से शामिल कर दिया जाय। पर क्या आने वाले भविष्य में हमारे सौर मंडल में फिर से 9 ग्रह होंगे? आपको क्या लगता है? क्या एक दिन प्लूटो या कोई और नया ग्रह हमारे सौर मंडल का 9वा ग्रह बनेगा? कमेंट करके अपनी राय हमें ज़रूर बताएँ

 

दोस्तों आज के लिए बस इतना ही। आशा करता हूँ कि मैने प्लूटो के बारे में आपकी हर उलझन को सुलझा दिया होगा। अगर आपको हमारा आर्टिकल अच्छा लगा, तो एक शेयर ज़रूर करे। आपका हर एक शेयर हमें आपके लिए ऐसे ही जानकारी से भरे और रोचक आर्टिकल्स के लिए प्रेरित करता है।

 



Top Trending

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Technology