बच्चा गर्भ में किन्नर कैसे बनता है Scientific Causes behind the Birth of Kinnar or Third Gender

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बच्चा गर्भ में किन्नर कैसे बनता है?

बच्चा गर्भ में किन्नर कैसे बनता है – दोस्तों हमारा समाज कुछ इस तरह का हैं कि वो स्त्री और पुरुष के अलावा किसी और जेंडर को इंसान की लिस्ट में नहीं रखता। इसकी पहचान कुछ ऐसी है कि सभ्य समाज में इसे अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता। लेकिन मानो या ना मानो ये तीसरा जेंडर यानि किन्नर भी हमारे ही समाज का एक हिस्सा है। आज के समय में किन्नरों को थर्ड जेंडर के नाम से जाना जाता है।

किन्नर कौन होते हैं ?

किन्नर, लगभग सभी ने यह नाम तो सुना ही होगा। अगर आप नहीं भी जानते हैं तो आपको बता दें कि किन्नर उन्हें कहते हैं जो ना तो पूरी तरह नर होता है और ना ही नारी। इन्हे हम ट्रांसजेंडर के नाम से भी जानते हैं। इनके बारे में आदि काल से ही एक मान्यता चली आ रही है कि अपने मुँह से ये किसी के लिए भी जैसे भी शब्द निकल देते हैं, वे सच साबित हो जाते हैं। कहने का मतलब है कि अगर ये किसी को दुआ दे देते हैं तो वो सच हो जाती हैं। वहीँ अगर ये किसी को बद्दुआ दे देते हैं तो वो भी सच हो जाती है। इसलिए ज्यादातर लोग इसी कोशिश में रहते हैं कि उन्हें केवल इनकी दुआ ही मिले, बद्दुआ नहीं।यही कारण है कि हर कोई किन्नरों को अपनी हर ख़ुशी में शामिल करना पसंद करता है। लोग इन्हे अपने घर के उत्सव यानी कोई शादी हो या किसी के घर बच्चा हो तो इन्हे उस ख़ुशी में शामिल जरूर हैं। और ये जब बधाई मांगते हैं तो इन्हे पैसे और कई तरह के उपहार आदि देकर खुशी खुशी विदा करते हैं।

लेकिन अफ़सोस की बात है कि उन्हें आम इंसानो की तरह समान दर्जा नहीं दिया जाता। इन्हे समाज से अलग रखा जाता है। इसके पीछे कुछ रूढ़िवादी लोगों का तर्क है कि पिछले जनम के गुनाहों की वजह से किन्नर का जन्म होता है या फिर ग्रहों की स्थिति की वजह से ऐसा होता है। लेकिन किन्नर होने की असली वजह क्या है यह कोई नहीं जनता। तो चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से इसके वैज्ञानिक राज से आपको रुवरुह करवाते हैं।

गर्भ में पल रहा बच्चा कब और कैसे किन्नर का रूप लेता ?

क्या आप जानते हैं कि गर्भ में पल रहा बच्चा कब और कैसे किन्नर का रूप ले लेता है। दरसल कुछ कारणों से गर्भ में पल रहा शिशु किन्नर बन जाता है। प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने के दौरान बच्चे के जेंडर का निर्धारण होता है कि वो लड़का होगा या लड़की। लेकिन अगर कोई महिला इस दौरान कोई ख़राब खान पान, हार्मोनल प्रॉब्लम या किसी भी दुर्घटना का शिकार होती है तो गर्भ में पल रहे शिशु में स्त्री या पुरुष की वजाय दोनों ही जेंडर के ऑर्गन्स और गुण आ जाते हैं। इसी वजह से प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने में ज्यादा सावधानी बरतने की हिदायत दी जाती है। फिर तीन महीने बाद गर्भ में पल रहे बच्चे का धीरे धीरे विकास होने लगता है।




गर्भ में शिशु का लिंग निर्धारण कैसे होता है?

दोस्तों हमारे शरीर में 46 क्रोमोसोम्स होते हैं, जिनमे 40 ओटोसोम होते हैं। जबकि 2 सेक्स क्रोमोसोम्स होते हैं। यही दो सेक्स क्रोमोसोम्स जेंडर डिसाइड करते हैं। पुरुषों में XY क्रोमोसोम्स मिलते हैं और महिलाओं में XX क्रोमोसोम्स। और इन्ही दोनों के मिलन से गर्भ में बच्चा विकसित होता है। ऐसे में अगर दो सेक्स क्रोमोसोम्स यानि XY और XX के अलावा कोई तीसरा पेयर बन जाता है यानि XXX या फिर YY तब बच्चा किन्नर पैदा होता है। और बच्चे में स्त्री और पुरुष दोनों के गुण आ जाते हैं। इस तरह प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीने में गर्भ में पल रहे बच्चे में क्रोमोसोम्स की संख्या और उनकी बनावट में परिवर्तन होने लगता है। जिसकी वजह से किन्नर शिशु जनम लेता है।

क्रोमोसोम डिसॉर्डर क्या है? और यह कैसे बनता है?

पुरुषों में XY क्रोमोसोम्स मिलते हैं और महिलाओं में XX क्रोमोसोम्स। और इन्ही दोनों के मिलन से गर्भ में बच्चा विकसित होता है। ऐसे में अगर दो सेक्स क्रोमोसोम्स यानि XY और XX के अलावा कोई तीसरा पेयर बन जाता है यानि XXX या फिर YY तब यह पेयर डिसॉर्डर कहलाता है।

बच्चे के किन्नर बनने के चांस कब ज्यादा होते हैं ?

  • दोस्तों अगर प्रेग्नेंट महिला किसी बीमारी से पीड़ित हो जाती है चाहें बीमारी कोई भी हो तब उसका प्रभाव शिशु पर पड़ता है।
  • शुरुआती तीन महीनों में महिला को तेज बुखार आ जाये और वह दवाई का हैवी डोज ले लेती है तो उससे भी थर्ड जेंडर होने के चान्सेस बढ़ जाते हैं।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान खराब भोजन करने या खास तरह के कैमिकल से तैयार फ्रूट या वेजिटेवल का सेवन करने से भी इस तरह की सम्भावना बढ़ जाती है।
  • प्रेग्नेंसी के शुरूआती स्टेज में एक्सीडेंट या फिर बड़ी चोट लगने की वजह से भी शिशु पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और इस तरह से बच्चे के ऑर्गन्स पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

इसलिए कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी के शुरूआती दिनों में खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। बुखार या फिर अन्य किसी भी तरह की परेशानी होने पर खुद डॉक्टर बनने से बचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर ही दवाई लेनी चाहिए और बाहर के खाने पर परहेज करना चाहिए।

तो दोस्तों आपने देखा कि एक किन्नर का जन्म किस तरह होता है, इसमें किन्नर का कोई दोष नहीं होता। ऐसे में हमें किन्नरों के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये भी हमारे समाज का ही एक हिस्सा हैं। दोस्तों शायद आपको इस विषय में जानकारी हो गई होगी। अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।



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