1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है नया साल, जानिए इतिहास

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1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है नया साल, जानिए इतिहास

भारत एक विविधता से भरा देश है और यहाँ मौजूद सभी धर्मों में नया साल अलग-अलग दिन सेलिब्रेट किया जाता है। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के महीने आने वाली गुड़ी पड़वा के दिन नया साल मनाया जाता और पंजाब में बैशाखी के दिन। पश्चिम बंगाल में बैशाखी के आस-पास ही नया साल मनाया जाता है। इस्लाम धर्मं में मुहर्रम के दिन नया साल मनाया जाता है वहीं हिन्दू धर्मं में दीपावली के दूसरे दिन नया साल मनाया जाता है।

हर धर्मं के हिसाब से अलग दिन नया साल होने के बावजूद 1 जनवरी को पूरे देश में नया साल क्यों सेलिब्रेट किया जाता है? आपके इस सवाल का जवाब हमारे पास है.

दरअसल 1 जनवरी को नया साल मनाने के पीछे कई कारण और मान्यताएं है। ऐसा माना जाता है कि जनवरी महीने का नाम रोमन के देवता ‘जानूस’ के नाम पर रखा गया था। मान्यताओं के अनुसार जानूस दो मुख वाले देवता थे। जिसमे एक मुख आगे की ओर वहीं दूसरा पीछे की ओर था। कहा जाता है कि दो मुख होने की वजह से जानूस को बीते हुए कल और आने वाले कल के बारे में पता रहता था। इसलिए देवता जानूस के नाम पर जनवरी को साल का पहला दिन माना गया और 1 जनवरी को साल की शुरुआत मानी गई। इसलिए 1 जनवरी को नए साल का जश्न मनाया जाता है।

इसके अलावा और भी कई कारण है जैसे 1 जनवरी के दिन पृथ्वी सूर्य के बेहद करीब होती है इसलिए भी इसे साल की शुरुआत कहा जाता है।

वहीं 1 जनवरी को नए साल मनाने का तार्किक कारण ये भी है कि 31 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन होता है, और उसके बाद आने वाले दिन लम्बे होते है। इसलिए 1 जनवरी को साल का पहला दिन माना जाता है और इसे ही साल की शुरुआत भी मानी जाती है. है

जनवरी से शुरू होने वाले कैलेंडर को ग्रिगोरियन कैलेंडर के नाम से जाना जाता है। जिसकी शुरूआत 15 अक्टूबर 1582 में हुई। क्योंकि ग्रेगोरियन कैलेंडर से पहले 10 महीनों वाला रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था। लेकिन इस कैलेंडर में कई गलतियां होने की वजह से हर साल क्रिसमस की तारीख कभी भी एक दिन में नहीं आया करती थी। इसी वजह से अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने एक नया कैलेंडर प्रस्तावित किया।

रूस के जूलियन कैंलेंडर में कई सुधार हुए और इसे 24 फरवरी को राजकीय आदेश से औपचारिक तौर पर अपना लिया गया। यह राजकीय आदेश पोप ग्रिगोरी ने दिया था, इसीलिए उन्हीं के नाम पर इस कैलेंडर का नाम ग्रेगोरियन रखा गया। और 15 अक्टूबर 1582 को लागू कर दिया गया। आज यही ग्रेगोरियन कैलेंडर पूरी दुनिया में मशहूर है और इसी में मौजूद पहले दिन यानि 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है।

तो कहने का मतलब यही है कि 1 जनवरी को नए साल मनाये जाने के कई अलग-अलग कारण है। इतिहास और अतीत की इन ख़ास वजहों से ही 1 जनवरी के दिन पूरी दुनिया में नए साल का जश्न मनाया जाता है।

 

 



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