हर साल गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

Must read




फिल्म ‘मणिकर्णिका’ की पंक्तियां हैं, ‘चाहे हम रहें या न रहें, देश बना रहना चाहिए।’ हां, हम सभी के लिए हमारे देश से बड़ा कुछ भी नहीं है। और हमें गर्व होना चाहिए कि हम भारत जैसे समृद्ध देश के निवासी हैं। न जाने कितने वीरों ने हमें आजादी दिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे में उन्हें अपने सम्मान में एकजुट होने का कोई मौका नहीं चूकना चाहिए।

गणतंत्र दिवस एक ऐसा विशेष दिन है, जो एक भारतीय के रूप में हमारे अस्तित्व की पहचान करता है इसलिए यह दिन हमारे लिए हमेशा गौरव का दिन होगा।

  • गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?
  • 26 जनवरी का इतिहास
  • गणतंत्र दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य

हर साल 26 जनवरी को भारत का गणतंत्र दिवस मनाया जाता है, जिसमें हमारे भारत देश के राष्ट्रपति सभी देशवासियों को संबोधित करते हैं और तिरंगा फहराते हैं साथ ही 21 तोपों की सलामी भी देते हैं। इसके बाद, अलग अलग राज्यों से झांकी निकलती है और भारत देश के कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह पता होना चाहिए कि यह दिन हमारे देश के इतिहास में सर्वोपरि क्यों है और इसे हर साल क्यों मनाया जाना महत्वपूर्ण है।

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

26 जनवरी क्यों मनाया जाता है, इसके बारे में भारतीयों में उत्सुकता होना स्वाभाविक है। गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है और यह देश में रहने वाले प्रत्येक निवासी का कर्तव्य है कि वह इस दिन को बहुत ही धूमधाम से मनाए और आने वाली पीढ़ियों को इस दिन का महत्व बताए। आपको बता दें कि स्वतंत्रता के तीन साल बाद 1950 में पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था, जब भारत को गणतंत्र घोषित किया गया था। भारत का संविधान इसी दिन से लागू हुआ।

भारत का राष्ट्रीय त्यौहार होने के कारण, यह दिन न तो किसी जाति के आधार पर मनाया जाता है, और ना ही किसी और संप्रदाय के आधार पर, बल्कि यह दिन एक राष्ट्र के अस्तित्व का प्रतीक है। यह दिन देशवासियों की उन यादों और बलिदानों से अवगत कराता है, जब भारत देश के वीरों ने अपने देश को आजाद करने के लिए लड़ाई लड़ी और हमें आजादी दिलाई।

गणतंत्र दिवस का दिन हमारे लिए गौरव और सम्मान का दिन है। किस तरह हमारे संविधान को मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार किया गया गणतंत्र दिवस का यह दिन हमे याद दिलाता है। जब भारत देश आजाद हुआ तब भारत देश का अपना कोई संविधान नहीं था। इसलिए आजादी के तीन साल बाद हमारे देश को एक लोकतांत्रिक देश का ख़िताब मिला था।




26 जनवरी 1950 को जब पहली बार भारत देश में संविधान लागू हुआ तब ये एक ऐतिहासिक दिन बन गया। उसके बाद से ही 26 जनवरी हमारे लिए एक अहम और महत्वपूर्ण दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

26 जनवरी का इतिहास – गणतंत्र दिवस का इतिहास

26 जनवरी हमारे देश के प्रत्येक नागरिक के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। वास्तव में, हमारी मातृभूमि बहुत ही लंबे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रही, और ब्रिटिशों ने भारत के लोगों को पर कई अत्याचार किये और उन्हें गुलामी के लिए मजबूर किया गया और साथ भारत के लोगों को ब्रिटिश शासन के कानूनों का पालन करने के लिए भी मजबूर किया गया। बहुत ही लंबे संघर्ष के बाद भारत देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 के लगभग तीन साल बाद भारत ने 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू किया।

दिसंबर 1929 में, पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में लाहौर में एक कांग्रेस अधिवेशन आयोजित हुआ था। इस सत्र में प्रस्ताव पारित करते हुए, यह घोषणा की गई कि यदि ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को 26 जनवरी 1930 तक डोमिनियन का दर्जा नहीं दिया गया, तो भारत को पूरी तरह से स्वतंत्र देश घोषित किया जाएगा।

गणतंत्र दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 31 दिसंबर 1929 की आधी रात को लाहौर में एक सत्र आयोजित किया। अधिवेशन में पहली बार भारत का तिरंगा फहराया गया।
  • देश के संविधान को 25 नवंबर 1949 को मंजूरी दी गई थी। 26 जनवरी 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे और उसके बाद संविधान को लागू किया गया था।
  • मूल कर्तव्यों को सोवियत संघ के संविधान और ऑस्ट्रेलिया के संविधान से समवर्ती सूची से लिया गया है।
  • गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्रगान तब गाया जाता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है।
  • भारतीय संविधान जर्मनी के संविधान में आपातकालीन प्रावधान प्रदान करता है।
  • भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को भारतीय मानक समय के अनुसार 10:18 बजे लागू हुआ।
  • लिखित संविधान में कई संशोधनों के बाद, इसे अपनाने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे।
  • 26 जनवरी 1950 को, इरविन स्टेडियम में गवर्नमेंट हाउस के दरबार हॉल में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह पहला गणतंत्र दिवस समारोह था। मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे।
  • गणतंत्र दिवस मनाने का वर्तमान तरीका 1955 में शुरू हुआ था। इस साल, पहली बार राजपथ पर परेड हुई थी। राजपथ परेड के पहले मुख्य अतिथि पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे।
  • संविधान में, संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन कनाडा के संविधान से लिया गया है।



Top Trending

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Technology